Ragini Preet

Top 10 of Ragini Preet

    इक मुहब्बत इक बग़ावत इक अदावत और मैं
    डूब कर निकला कहाँ फिर चैन राहत और मैं

    कितने चेहरे एक चेहरे पर लगा ख़ुद ग़ुम हुई
    आइने से जूझता साकित हक़ीक़त और मैं

    सब्र और ईमान से प्याला मिली हाला नहीं
    फिर तराज़ू पर पड़े हैं दीन दौलत और मैं

    तोड़ लाना है ख़ला के शाख़ से कोकब हसीं
    गिरते पड़ते बढ़ रहे हैं इश्क़ हिम्मत और मैं

    कोह से टकरा रही है ज़िंदगी एक बार फिर
    जीतता है कौन देखें या कि क़िस्मत और मैं
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    हवा जंगल घटा रोई नदी सूखी हुआ क्या है
    उजाड़ा है चमन जिस ने भला उस की सज़ा क्या है

    सितारों पर जो रहते थे गली में फिर रहे साहब
    सियासी बात लगती है पता कर माजरा क्या है

    लगा कर आग सीनों में जिन्होंने रोटियाँ सेकीं
    खुरच कर ज़ख़्म वो हर बार पूछे अब हुआ क्या है


    सिसक कर तीरगी में उम्र को गुमनाम क्यूँ करना

    चराग़ों की तरह जल देख जीने में मज़ा क्या है
    बहुत उलझे हैं मंसूबे समझना 'प्रीत' है मुश्किल

    यहाँ ख़ुदग़र्ज़ दुनिया में वफ़ा क्या है दग़ा क्या है
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    तेरी गोदी में पहली बार जब आया बहुत रोया
    जुदा होकर तेरी गोदी से मैं पापा बहुत रोया

    फ़ना कर के शजर सारे मैं इतराया अमीरी पे
    जो आई साँस पे आफ़त पकड़ माथा बहुत रोया

    क़दीमी पाप नदियों में बहा फिर पाप करते हैं
    ठगी ये देख कर बेबस हुआ दरिया बहुत रोया

    ख़िताबें ख़ूब हासिल की दुशाला वाह-वाही भी
    रिज़र्वेशन ने जब मारा भरम टूटा बहुत रोया

    हुआ मुश्किल मिलाना काफ़िया तुम से मुहब्बत में
    मगर तुक तोड़ कर तुम से नयन मेरा बहुत रोया
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    बा'द मुद्दत के हसीं रात सुहानी आई
    तेरे दीदार से साँसों में रवानी आई

    नूर फैला है अमावस में ग़ज़ब का देखो
    चाँदनी ओढ़ अँधेरे में दिवानी आई

    मंज़िलें एक थीं अपनी भी कभी चाहत में
    मुख़्तलिफ़ मोड़ पे लेकिन ये कहानी आई

    बे-वफ़ा तुम न हुए हम भी दग़ाबाज़ न थे
    उलझनें दिल की हमें बस न मिटानी आई

    'प्रीत' बरसात में मिट्टी की महक आई है
    बह के फिर गाँव से कुछ याद पुरानी आई
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    पसीना पोटली में बस लिए लौटा है दिनभर की
    यही तनख़्वाह है इस देश में मज़दूर नौकर की

    भला फ़ौलाद बनकर भी जहाँ को किस ने जीता है
    यहाँ चंगेज़ भी हारा मिटी हस्ती सिकंदर की

    हथेली की लकीरें तुम से मंज़िल का पता पूछें
    नई पहचान लिख हाथों से ख़ुद अपने मुक़द्दर की

    न रख तलवार हाथों में क़लम की धार पैनी रख
    मिटा देती है हस्ती शब्द की ताक़त सितमगर की

    इबादतगाह तुम माँ-बाप के क़दमों में ही जानो
    यहीं जन्नत है असली प्रीत बेज़ा खाक़ दर-दर की
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    याद है थोड़ा बहुत क़िस्सा पुराना हो गया
    इक झरोखा था यहाँ गुज़रा ज़माना हो गया

    चाँदनी में जो मिला था आब-ए-शीशा की तरह
    वो अमावस रात में बस इक फ़साना हो गया

    एक साया साथ चलता था बदन से भी क़रीब
    शाम ढलते क्यूँ न जाने उस का जाना हो गया

    अब तुम्हारी याद की किर्चें नहीं चुभतीं मुझे
    इश्क़ का वो हादसा बिसरा तराना हो गया

    अब किसी वादे में दावों में नहीं आना मुझे
    सोचती हूँ सोचने में ही ज़माना हो गया
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    बड़ी ही जानलेवा सी असर रखतीं तेरी आँखें
    सुकूँ को छीन कर दिल पर सितम ढातीं तेरी आँखें

    किसी नायाब हीरे सी हिफ़ाज़त जिस की मैं ने की
    चुरा लेती थी उस दिल को फ़रेबी थीं तेरी आँखें

    भरी रहती है सजदे से दुआ के अश्क में भीगी
    किसी मंदिर में दीपक सी मुझे लगतीं तेरी आँखें

    मुसीबत कितनी भी आए मैं उस से जीत जाऊँगी
    लगा काजल का इक टीका बला हरतीं तेरी आँखें

    गुज़ारी ज़िंदगी सब धूप की बैठक में जल जल कर
    भरी गर्मी में शीतल छाँव सी रहतीं तेरी आँखें

    ज़बाँ जो कह नहीं पाती कई पोशीदा अफ़साने
    वो तेरा हाल-ए-दिल बे ख़ौफ़ हो कहतीं तेरी आँखें

    अरे लहरें ख़ुमारी में गगन के पार जाती हैं
    समुंदर का भी प्याला जाम से भरतीं तेरी आँखें
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    सर्फ़ तुम पर ज़िंदगी का लम्हा लम्हा तक करें
    ज़ब्र ये है ज़िन्दगी पर हक़ बहुत लोगों का है
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    बज़्म प्याला शे'र शाइ'र और मैं
    बिखरी हाला बीता मंज़र और मैं

    ख़त भी भीगे जाम भी छल का बहुत
    रात रोई नम था बिस्तर और मैं

    दर्द की कश्ती भँवर में आ गई
    सब्र टूटा डूबा लंगर और मैं

    दिल से जो तुम ने गिराया बे-वफ़ा
    टुकड़ा टुकड़ा टूटा अख़्तर और मैं

    हिज्र की आँधी में सब उजड़ा यहाँ
    बस बचे वीरान मरमर और मैं
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    Ragini Preet
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    बेज़ुबानों ने ये शिकायत की
    हाल बद-हाल सी है क़ुदरत की

    जंगलों पर नगर का क़ब्ज़ा है
    अर्श पर गर्द ने हुकूमत की

    थी सड़क पर मरी हुई बिटिया
    जिस की बुत शक्ल में इबादत की

    यादों की बाढ़ दिल में आई है
    रात आई है ज्यूँ कयामत की

    'प्रीत' दिल हार कर नहीं आना
    राह आसाँ नहीं मुहब्बत की
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    Ragini Preet
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