ha | हमें देखा न कर उड़ती नज़र से

  - Bakul Dev
हमेंदेखाकरउड़तीनज़रसे
उमीदोंकेनिकलआतेहैंपरसे
अबउनकीराखपलकोंपरजमीहै
घड़ीभरख़्वाबचमकेथेशररसे
बचानेमेंलगीहैख़ल्क़मुझको
मैंज़ाएअ'होरहाहूँइसहुनरसे
वोलहजा-हा-ए-दरिया-ए-सुख़नमें
मुसलसलबनतेरहतेहैंभँवरसे
समुंदरहैकोईआँखोंमेंशायद
किनारोंपरचमकतेहैंगुहरस
तवक़्क़ो'हैउन्हेंउसअब्रसेजो
दिखाईदेइधरउसओरबरसे
ज़राइम्कानक्यादेखानमीका
निकलआएशजरदीवार-ओ-दरसे
रक़मदिलपरहुआक्याक्यापूछो
बयाँहोनाहैयेक़िस्सानज़रसे
सँभलतेहीनहींहमसे'बकुल'अब
बचेहैंदिनयहाँजोमुख़्तसरसे
  - Bakul Dev
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Nazar Shayari

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