जुनून-ए-रंग हम-आहंगी-ए-मज़ाक़ तुम्हीं
बिना-ए-रंज तुम्हीं वज्ह-ए-इत्तिफ़ाक़ तुम्हीं
तुम्हीं हो रौशनी-ए-तब-कुश्तगान-ए-हयात
शब-ए-सियाह अलम में सिराज-ए-ताक़ तुम्हीं
रवाँ-दवाँ नहीं मुझ में कोई तुम्हारे सिवा
तुम्हीं हो मंज़र-ए-मव्वाज चश्म-ए-वाक़ तुम्हीं
तुम्हीं से हों तो ये क्यूँँ सोचता हूँ मैं क्या हूँ
तुम्हीं कि हुस्न-ए-जहाँ भी हो हुस्न-ए-ताक़ तुम्हीं
मैं आइने की तरह बे-ख़बर हूँ हैराँ हूँ
मैं कैसे बोलों कि राक़ी तुम्हीं हो राक़ तुम्हीं
ये ख़ैर-ओ-शर में तनासुब तुम्हीं से क़ाएम है
तुम्हीं हो मुसबत-ओ-मनफ़ी के संग-ए-हाक़ तुम्हीं
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