रह गया राह में जब कुछ भी न काँटों के सिवा
तीरगी झूट की जब छा गई सच्चाई पर
तीरगी झूट की जब छा गई सच्चाई पर
उफ़ुक़-ए-ज़िंदा-ओ-पाइंदा-ए-ननकाना से
हँस पड़ी एक किरन वक़्त की तन्हाई पर
दिल के सुनसान खंडर में कोई नग़्मा जागा
आँख मलती हुई इक सुब्ह बयाबाँ से उठी
फ़िक्र आज़ाद हुई ज़ेहन के जाले टूटे
और ईक़ान की लौ सीना-ए-इंसाँ से उठी
ज़हर में डूब गई थीं जो ज़बानें यकसर
उन पे शीरीनी-ए-वहदत के तराने आए
जिस्म मरता है मगर रूह कहाँ मरती है
रूह इक नूर है और जिस्म थिरकते साए
जिस्म काँटों से गुज़रता है गुज़र जाने दो
रूह वो फूल है जिस पर न ख़िज़ाँ आएगी
रूह पी लेगी जो इर्फ़ान-ओ-मुहब्बत की शराब
मस्ती-ओ-कैफ़ हमेशा के लिए पाएगी
पीर-ए-नंगाना तिरी रूह-ए-सदाक़त को सलाम
जावेदाँ परचम-ए-उल्फ़त तिरा लहराता है
Read Fullहँस पड़ी एक किरन वक़्त की तन्हाई पर
दिल के सुनसान खंडर में कोई नग़्मा जागा
आँख मलती हुई इक सुब्ह बयाबाँ से उठी
फ़िक्र आज़ाद हुई ज़ेहन के जाले टूटे
और ईक़ान की लौ सीना-ए-इंसाँ से उठी
ज़हर में डूब गई थीं जो ज़बानें यकसर
उन पे शीरीनी-ए-वहदत के तराने आए
जिस्म मरता है मगर रूह कहाँ मरती है
रूह इक नूर है और जिस्म थिरकते साए
जिस्म काँटों से गुज़रता है गुज़र जाने दो
रूह वो फूल है जिस पर न ख़िज़ाँ आएगी
रूह पी लेगी जो इर्फ़ान-ओ-मुहब्बत की शराब
मस्ती-ओ-कैफ़ हमेशा के लिए पाएगी
पीर-ए-नंगाना तिरी रूह-ए-सदाक़त को सलाम
जावेदाँ परचम-ए-उल्फ़त तिरा लहराता है
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कौन सा घर है जवाँ जल्वों से पुर-नूर नहीं
इक मिरे दिल की ही दुनिया है जो मा'मूर नहीं
अपनी हिम्मत ही से पहुँचूँगा सर-ए-मंज़िल-ए-शौक़
लूँ सहारा मैं किसी का मुझे मंज़ूर नहीं
ग़म-ए-जानाँ को भुला दूँ न करूँ दोस्त को याद
इतना मैं ऐ ग़म-ए-दौराँ अभी मजबूर नहीं
ये मोहब्बत की है क़ीमत ये मोहब्बत का सिला
कि हमारे ही लिए इश्क़ का दस्तूर नहीं
दोनों आलम को डुबो दे जो मय-ओ-मीना में
चश्म-ए-साक़ी के सिवा और का मक़्दूर नहीं
मुस्कुरा दो तो मिरा ग़ुंचा-दिल खिल जाए
दिल कभी खिल न सके ऐसा भी रंजूर नहीं
तुम नहीं पास मगर साथ है यादों का हुजूम
मैं अकेला नहीं बेकस नहीं महजूर नहीं
आज कुछ शाम से तारीक है दिल की महफ़िल
तुम नहीं हो तो वो रौनक़ नहीं वो नूर नहीं
मुझ में हिम्मत है कि मैं राज़ को इफ़्शा न करूँ
ये मिरा ज़र्फ़ है ये शेवा-ए-मंसूर नहीं
कर सकेगा न जुदा फ़ासला-ए-वक़्त-ओ-मकाँ
दूर नज़रों से सही दिल से मगर दूर नहीं
मेरी तक़दीर में 'दर्शन' हैं किसी के जल्वे
शुक्र सद शुक्र कि दुनिया मिरी बे-नूर नहीं
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ज़िंदगी वो जो हरीफ़-ए-ग़म-ए-अय्याम रहे
दिल शिकस्ता है तो क्या साज़ उठाओ तो सही
जाग उट्ठेगी ये सोई हुई दुनिया लेकिन
पहले ख़्वाबीदा तमन्ना को जगाओ तो सही
फूल ही फूल हैं कहते हो जिन्हें तुम काँटे
मेरी दुनिया-ए-जुनूँ में कभी आओ तो सही
तुम्हें आबाद नज़र आएगी उजड़ी दुनिया
दिल की दुनिया को मोहब्बत से बसाओ तो सही
ज़िंदगी फिर से जवाँ फिर से हसीं हो जाए
उन की आँखों से ज़रा आँख मिलाओ तो सही
करते फिरते हो अँधेरे की शिकायत 'दर्शन'
दिल की दुनिया में कोई दीप जलाओ तो सही
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पहले भी जैसे देख चुके हों उन्हें कहीं
अंजान वादियों में कुछ ऐसे निशाँ मिले
बढ़ता गया मैं मंज़िल-ए-महबूब की तरफ़
हाइल अगरचे राह में संग-ए-गराँ मिले
रोना पड़ा नसीब के हाथों हज़ार बार
इक बार मुस्कुरा के जो तुम मेहरबाँ मिले
हम को ख़ुशी मिली भी तो बस आरज़ी मिली
लेकिन जो ग़म मिले वो ग़म-ए-जावेदाँ मिले
बाक़ी रहेगी हश्र तक उन के करम की याद
मुझ को रह-ए-हयात में जो मेहरबाँ मिले
फिर क्यूँ करे तलाश कोई और आस्ताँ
वो ख़ुश-नसीब जिस को तिरा आस्ताँ मिले
अहल-ए-सितम की दिल-शिकनी का सबब हुआ
दिल का ये हौसला कि ग़म बे-कराँ मिले
साक़ी की इक निगाह से काया पलट गई
ज़ाहिद जो मय-कदे में मिले नौजवाँ मिले
दैर-ओ-हरम के लोग भी दरमाँ न कर सके
वो भी असीर-ए-कश्मकश-ए-ईन-ओ-आँ मिले
नज़रें तलाश करती रहीं जिन को उम्र-भर
'दर्शन' को वो सुकून के लम्हे कहाँ मिले
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हरम वाले तो पूछेंगे बता तू किस का बंदा है
ख़ुदा से पहले लब पर उन का नाम आया तो क्या होगा
मुझे मंज़ूर उन से मैं न बोलूँगा मगर नासेह
अगर उन की निगाहों का सलाम आया तो क्या होगा
चला है आदमी तसख़ीर-ए-मेहर-ओ-माह की ख़ातिर
मगर सय्याद ही ख़ुद ज़ेर-ए-दाम आया तो क्या होगा
मुझे तर्क-ए-तलब मंज़ूर लेकिन ये तो बतला दो
कोई ख़ुद ही लिए हाथों में जाम आया तो क्या होगा
मोहब्बत के लिए तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ ही ज़रूरी हो
मोहब्बत में अगर ऐसा मक़ाम आया तो क्या होगा
जहाँ कुछ ख़ास लोगों पर निगाह-ए-लुत्फ़ है 'दर्शन'
अगर उस बज़्म में दौर-ए-अवाम आया तो क्या होगा
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इक करम की निगाह कर दीजे
उम्र-भर का सितम गवारा है
रक़्स में हैं जो साग़र-ओ-मीना
किस की नज़रों का ये इशारा है
ऐसी मंज़िल पे आ गया हूँ दोस्त
तिरे ग़म का फ़क़त सहारा है
लौट आए हैं यार के दर से
वक़्त ने जब हमें पुकारा है
दिल न टूटे तो ज़र्रा-ए-नाचीज़
कीमिया है जो पारा पारा है
जाम-ए-रंगीं में उन का अक्स-ए-जमाल
या शफ़क़ में कोई सितारा है
नाव टकरा चुकी है तूफ़ाँ से
अपना मुर्शिद ही अब सहारा है
इश्क़ करना है मात खा जाना
उस में जीता हुआ भी हारा है
अपने 'दर्शन' पे इक निगाह-ए-करम
कि ग़म-ए-ज़िंदगी का मारा है
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आज दिल से दुआ करे कोई
हक़्क़-ए-उल्फ़त अदा करे कोई
हक़्क़-ए-उल्फ़त अदा करे कोई
जिस तरह दिल मिरा तड़पता है
यूँ न तड़पे ख़ुदा करे कोई
जान-ओ-दिल हम ने कर दिए क़ुर्बां
वो न माने तो क्या करे कोई
दिल-ए-बेताब की तमन्ना है
फिर कहूँ मैं सुना करे कोई
मस्त नज़रों से ख़ुद मिरा साक़ी
फिर पिलाइए पिया करे कोई
मय-ए-इरफ़ाँ के हम भी हैं मुश्ताक़
दर-ए-मय-ख़ाना वा करे कोई
शौक़-ए-दीदार दिल में है 'दर्शन'
आ भी जाए ख़ुदा करे कोई
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चमन की जश्न-गाह में उदासियाँ भी कम न थीं
जली जो कोई शम-ए-गुल कली का दिल बुझा गई
बुतान-ए-रंग-रंग से भरे थे बुत-कदे मगर
तेरी अदा-ए-सादगी मिरी नज़र को भा गई
मेरी निगाह-ए-तिश्ना-लब की सर
ख़ुशी न पूछिए
के जब उठी निगाह-ए-नाज़ पी गई पिला गई
ख़िज़ाँ का दौर है मगर वो इस अदास आए हैं
बहार 'दर्शन'-ए-हज़ीं की ज़िंदगी पे छा गई
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ग़म-ए-जहाँ को ग़म-ए-ज़ीस्त को भुला के पियो
हसीन गीत मोहब्बत के गुनगुना के पियो
छुटे न दामन-ए-ताअ'त भी वक़्त-ए-मय-नोशी
पियो तो सज्दा-ए-उल्फ़त में सर झुका के पियो
बुझे बुझे से हों अरमाँ तो क्या फ़रोग़-ए-नशात
जो सो गए हैं सितारे उन्हें जगा के पियो
ग़म-ए-हयात का दरमाँ हैं इश्क़ के आँसू
अँधेरी रात है यारो दिए जला के पियो
नसीब होगी बहर-कैफ़ मर्ज़ी-ए-साक़ी
मिले जो ज़हर भी यारो तो मुस्कुरा के पियो
मिरे ख़ुलूस पे शैख़-ए-हरम भी कह उट्ठा
जो पी रहे हो तो 'दर्शन' हरम में आ के पियो
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मेरी चाहतों को न पूछिए जो मिला तलब से सिवा मिला
मिरी दास्ताँ ही अजीब है मिरा मसअला कोई और है
ये हवस के बंदे हैं नासेहा न समझ सके मिरा मुद्दआ'
मुझे प्यार है किसी और से मिरा दिल-रुबा कोई और है
मिरा ज़ौक़-ए-सज्दा है ज़ाहिरी कि है कश्मकश मिरी ज़िंदगी
ये गुमान दिल में रहा सदा मिरा मुद्दआ' कोई और है
वो रहीम है वो करीम है वो नहीं कि ज़ुल्म करे सदा
है यक़ीं ज़माने को देख कर कि यहाँ ख़ुदा कोई और है
मैं चला कहाँ से ख़बर नहीं कि सफ़र में है मिरी ज़िंदगी
मिरी इब्तिदा कहीं और है मिरी इंतिहा कोई और है
मिरा नाम 'दर्शन'-ए-ख़स्ता-तन मिरे दिल में कोई है ज़ौ-फ़गन
मैं हूँ गुम किसी की तलाश में मुझे ढूँढ़ता कोई और है
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