बोरिया भी नहीं उसे दरकार
जिस के तईं शौक़-ए-बे-रियाई है
गुल सब हँसते हैं बज़्म-ए-गुलशन में इश्क़-ए-बुलबुल मगर रियाई है
जल्द जाती है आसमाँ ऊपर
आह मेरी अजब हवाई है
शम्-ए-मीना के नूर सूँ साक़ी
महफ़िल दिल में रौशनाई है
हर घड़ी देखता है दर्पन कूँ
शोख़ में तर्ज़-ए-ख़ुद-नुमाई है
जब सूँ देखा हूँ उस की ज़ुल्फ़-ए-दराज़
तब सूँ मुझ फ़िक्र में रसाई है
काँ यूँ देखा है ख़्वाब में मख़मल
तुझ कफ़-ए-पा में जो सफ़ाई है
क्यूँ न हुए माह-ए-नौ मिसाल-ए-अज़ीज़
जिस मने रस्म-ए-कम-नुमाई है
दस्त-ए-गुल-रू में पहुँचने 'दाऊद'
काग़ज़-ए-ख़त मिरा हिनाई है
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गुल-बदन के गुल-ए-रुख़्सार का जो है बुलबुल
उस कूँ नज़ारा-ए-गुलज़ार सेती क्या मतलब
गर्दिश-ए-चश्म ने साक़ी की लिया होश तमाम
अब मुझे ख़ाना-ए-ख़ु़म्मार सेती क्या मतलब
मुझ कूँ लिखना है सिरीजन कूँ मिरे नामा-ए-सुर्ख़
नीं तो इस दीदा-ए-ख़ूँ-बार सेती क्या मतलब
जिस ने 'दाऊद' नजा नंग हो दीवाना-ए-इश्क़
उस कूँ रुस्वाई-ए-संगसार सेती क्या मतलब
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साफ़ दिल है जो आरसी मानिंद
नित है हैराँ जमाल-ए-रौशन का
गरचे होना है ऐब-पोशी जहाँ
कस्ब कर इख़्तियार सोज़न का
क्यूँ न हुए आशिक़ी में ख़ौफ़ रक़ीब
हर सफ़र में ख़तर है रहज़न का
ज़ोहद-ए-ज़ाहिद है ख़ौफ़-ए-महशर सूँ
ताब नामर्द कूँ कहाँ रन का
ख़ाक हो यार की गली मत छोड़
गरचे कुछ मुद्दआ' है दामन का
सब्र कर हिज्र में तूँ ऐ 'दाऊद'
देखना है अगर सिरीजन का
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आतिश-ए-इश्क़ सूँ जो जलता है
वो सदा मिस्ल-ए-शम्अ गलता है
वो सदा मिस्ल-ए-शम्अ गलता है
थाम क्यूँकर सकूँ वफ़ूर-ए-सरिश्क
बहर-ए-दिल ग़म सती उबलता है
बहर-ए-दिल में है गरचे गौहर-ए-अश्क
सदफ़दुर-ए-चश्म सूँ निकलता है
रोज़-ए-बद कुइ रफ़ीक़ नीं किस का
साया वक़्त-ए-ज़वाल ढलता है
जब सूँ रौशन है मुझ सुख़न का शम्अ'
रश्क सेतीं 'सिराज' जलता है
शे'र 'दाऊद' का मिसाल-ए-ख़ार
हासिदों के जिगर में सलता है
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देख लटका सजन तेरी लट का
उस की हर मू-ब-मू में दिल अटका
उस की हर मू-ब-मू में दिल अटका
आब-ए-तेग़-ए-निगह के प्यासे कूँ
कम-निगाही का मार मत फटका
ग़म्ज़ा तेरा अजब सिपाही है
जिस की दहशत सूँ बुल-हवस सटका
इश्क़ का ज़हर उस सूँ क्यूँ तेरे
नाग तुझ ज़ुल्फ़ का जिसे चटका
मुस्तइद हैं तेरे यूँ मर्दुम-ए-चश्म
मुझ को अबरू का मारने सट का
होश 'दाऊद' का हुआ लट-पट
देख कर तेरी नाज़ का लटका
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जो साफ़-दिल है उस में कुदूरत का असर नीं
हर-चंद अगर दुश्मन-ए-आईना नफ़स है
लेता हूँ अपस मदरसा-ए-दिल में सबक़ मैं
उस शोख़ मुदर्रिस का वहाँ जब सूँ दरस है
यक लम्हा न हो मुझ सूँ जुदा ऐ मह-ए-ताबाँ
हर आन तिरे हिज्र का मुझ हक़ में बरस है
'दाऊद' न कर पुर्सिश-ए-महशर सती कुछ ख़ौफ़
वाँ आल-ए-मोहम्मद की शफ़ाअत तुझे बस है
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तहसील-ए-उलूम-ए-इश्क़ करने
तुझ मुख की किताब ख़ूब है ख़ूब
नीं तेरे अरक़ मिसाल-ए-ख़ुशबू
हर चंद गुलाब ख़ूब है ख़ूब
जिऊँ मतला-ए-आफ़्ताब-ए-ताबाँ
तुझ मुख पे नक़ाब ख़ूब है ख़ूब
उश्शाक़ अगर है महरम-ए-राज़
दिलबर कूँ हिजाब ख़ूब है ख़ूब
ला साग़र-ए-मय शिताब साक़ी
बारान-ए-सहाब ख़ूब है ख़ूब
'दाऊद' अपस सूँ होते बेहोश
आशिक़ कूँ शराब ख़ूब है ख़ूब
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गर्दिश-ए-चश्म का दिखा यक दौर
हम कूँ मस्त-ए-शराब करते हैं
आतिश-ए-इश्क़ की अगन सूँ जला
आशिक़ाँ कूँ कबाब करते हैं
ताब दिखला जमाल-ए-रौशन का
आरसी ग़र्क़-ए-आब करते हैं
बैत-ए-अबरू पे तिल सूँ काजल के
नुक़्ता-ए-इंतिख़ाब करते हैं
अरक़-ए-गुल-रुख़ाँ को देख उश्शाक़
मैल इत्र-ए-गुलाब करते हैं
देख उस के हिना कूँ मर्दुम-ए-चश्म
ख़ून-ए-दिल सूँ ख़िज़ाब करते हैं
सुन सुख़न-दाँ तिरी ग़ज़ल 'दाऊद'
आफ़रीं कर ख़िताब करते हैं
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उस क़िबला-रू की देख के मेहराब-ए-अब्र वाँ
सफ़ बाँध खुल रहे हैं मिज़ा जि
यूँ दुआ के हाथ
हर वक़्त बे-हिजाब हो क्यूँकर करे निगाह
है इख़्तियार चश्म-ए-पिया का हया के हाथ
किस रंग सूँ लगे है कफ़-ए-पा कूँ शोख़ की
दिल ख़ून हो रहा है हमारा हिना के हाथ
गुलगूँ क़बा न मार तग़ाफ़ुल की तेग़ सूँ
है क़त्ल आशिक़ाँ का तिरी यक अदा के हाथ
बरजा है बर्ग-ए-गुल सूँ कफ़न उस कूँ हुए नसीब
जो कुइ हुआ शहीद वो गुल-गूँ क़बा के हाथ
है चाक चाक ग़ुंचा-ए-दिल आज आह सूँ
ज्यूँ चाक-ए-पैरहन कूँ किया गुल सबा के हाथ
कहते हैं आशिक़ाँ यूँ मिरा हाल देख कर
शायद तूँ दिल दिया है किसी बे-वफ़ा के हाथ
दरकार नीं है मुझ कूँ कबूतर की क़ासिदी
भेजा हूँ गुल-बदन कूँ मैं नामा सबा के हाथ
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आतिश-ए-इश्क़ सूँ तिरी जल जल
दिल हुआ दिल हुआ कबाब कबाब
दूर मुख सूँ अरक़ न कर गुल-रू
दे मुझे दे मुझे गुलाब गुलाब
कह अपस चश्म-ए-बा-हया कूँ सनम
रफ़'अ कर रफ़'अ कर हिजाब हिजाब
देख छुपता है अब्र में ख़ुर्शीद
दूर कर दूर कर नक़ाब नक़ाब
मुंतज़िर दिल है यार के ख़त का
क़ासिद आ क़ासिद आ शिताब शिताब
शेवा-ए-गुल-रुख़ाँ है ऐ 'दाऊद'
ग़म्ज़ा ओ ग़म्ज़ा ओ इताब इताब
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